मेरठ जेल में बंदियों ने बनाए तिरंगे, 80 स्थानों तक पहुंचा राष्ट्रप्रेम का संदेश

मेरठ। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को सामाजिक सरोकार और सुधार की भावना से जोड़ते हुए वीरीना फाउंडेशन ने एक अनूठी पहल की। जिला कारागार मेरठ में निरुद्ध बंदियों द्वारा तैयार किए गए राष्ट्रीय ध्वजों को देश के 80 अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाया गया। इनमें लद्दाख के विद्यालयों और सीमावर्ती गांवों के साथ-साथ विभिन्न शहरों के सरकारी स्कूल भी शामिल रहे।

 

इस पहल का उद्देश्य तिरंगे के माध्यम से देश की एकता, राष्ट्रप्रेम और गौरव का संदेश दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचाना रहा। खास बात यह रही कि इन राष्ट्रीय ध्वजों को तैयार करने में जिला कारागार मेरठ में निरुद्ध बंदियों ने अपनी मेहनत और हुनर का योगदान दिया।

 

‘सुधार से सम्मान’ का संदेश

 

जिला कारागार मेरठ के वरिष्ठ अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के मार्गदर्शन और सहयोग से बंदियों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा गया। तिरंगा निर्माण की इस पहल ने जेल में चल रहे सुधार और पुनर्वास के प्रयासों को राष्ट्रनिर्माण की भावना से जोड़ने का काम किया।

 

वीरीना फाउंडेशन के संस्थापक एवं निदेशक धीरेन्द्र सिंह ने कहा कि तिरंगा केवल राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि भारत की एकता, त्याग, संघर्ष और सामूहिक गौरव का प्रतीक है। संस्था का प्रयास रहा कि मेरठ जेल में तैयार तिरंगा देश के उन हिस्सों तक पहुंचे, जहां बच्चे और ग्रामीण इसे देखकर राष्ट्र के प्रति गर्व और अपनत्व महसूस कर सकें।

 

मेरठ से लद्दाख तक पहुंचा तिरंगे का संदेश

 

अभियान के तहत मेरठ में तैयार तिरंगे लद्दाख के विद्यालयों और सीमावर्ती गांवों सहित देश के विभिन्न हिस्सों में भेजे गए। इसके अलावा लखनऊ, उन्नाव, मेरठ, फरीदाबाद और बिजनौर के सरकारी विद्यालयों तक भी तिरंगे पहुंचाए गए।

 

लद्दाख जैसे दुर्गम और सीमावर्ती क्षेत्र के स्कूलों तक मेरठ की जिला कारागार में तैयार तिरंगा पहुंचना इस पहल को खास बनाता है। इसका उद्देश्य बच्चों और ग्रामीणों को यह संदेश देना रहा कि देश के हर कोने का भारत की मुख्यधारा से भावनात्मक जुड़ाव है।

 

80 स्थानों तक पहुंचा ‘एक भारत’ का संदेश

 

‘80 स्थान, एक तिरंगा, एक भारत’ की अवधारणा के साथ वीरीना फाउंडेशन ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इस अभियान को व्यापक रूप देने का प्रयास किया। संस्था के अनुसार, तिरंगे को अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाकर लोगों को एक भावनात्मक सूत्र में जोड़ने की कोशिश की गई।

 

इस पहल का सबसे मानवीय पहलू यह रहा कि जेल की चारदीवारी के भीतर तैयार हुए तिरंगे देश के अलग-अलग हिस्सों में स्वतंत्रता, सम्मान, उम्मीद और सकारात्मक बदलाव का संदेश लेकर पहुंचे।

 

जेल से निकला बदलाव और उम्मीद का संदेश

वीरीना फाउंडेशन लंबे समय से जिला कारागार मेरठ में सुधार एवं पुनर्वास से जुड़े प्रयासों में सहभागी रहा है। तिरंगा निर्माण जैसी गतिविधियां बंदियों को उनके कौशल के उपयोग, आत्मसम्मान और सकारात्मक सोच से जोड़ने का माध्यम बन रही हैं।

धीरेन्द्र सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस की भावना तभी सार्थक होगी, जब समाज के हर व्यक्ति को सम्मान और बदलाव का अवसर मिले। मेरठ की जेल में तैयार तिरंगा जब देश के किसी दूरदराज विद्यालय में बच्चे के हाथों में पहुंचता है, तो वह महज एक ध्वज नहीं, बल्कि सुधार, पुनर्वास, उम्मीद और एक भारत की भावना का प्रतीक बन जाता है।

इस अभियान में वीरीना फाउंडेशन की टीम और स्वयंसेवकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। मेरठ की जिला कारागार से शुरू हुई यह पहल इस संदेश के साथ आगे बढ़ी कि तिरंगा हर भारतीय का है और राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक योगदान देने का अवसर हर व्यक्ति के पास है।