पॉक्सो मामले में मोहम्मद मकबूल आलम बरी, बोले- न्यायपालिका पर था पूरा भरोसा

■ रुधासा निवासी ने फैसले के बाद न्यायालय के प्रति जताया आभार, कहा- आरोपों से सामाजिक छवि प्रभावित हुई, लेकिन सत्य और न्याय पर भरोसा कभी नहीं टूटा

News4Bihar | किशनगंज | ठाकुरगंज प्रखंड की छैतल पंचायत अंतर्गत रुधासा निवासी मोहम्मद मकबूल आलम को पॉक्सो एक्ट से जुड़े एक मामले में न्यायालय से राहत मिली है। उनके अनुसार, न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों पर विचार करने के बाद उन्हें आरोपों से बरी कर दिया। फैसले के बाद उन्होंने न्यायपालिका के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें शुरू से ही न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा था।

पत्रकारों से बातचीत में मकबूल आलम ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व एक युवती की शिकायत पर उनके खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद वे लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया से गुजरते रहे। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्हें सामाजिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कानून पर विश्वास बनाए रखा और न्यायालय के निर्णय का इंतजार किया।

मकबूल आलम ने कहा कि मामले के कारण उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई। उनका दावा है कि कुछ लोगों ने इस प्रकरण को आधार बनाकर उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया। हालांकि, उन्होंने किसी व्यक्ति का नाम लिए बिना कहा कि उन्हें विश्वास था कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद सच्चाई सामने आएगी।

उन्होंने कहा, “मुझे माननीय न्यायालय पर शुरू से पूरा भरोसा था। मुझे विश्वास था कि सभी साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर न्याय मिलेगा। अब न्यायालय के फैसले से मेरा न्याय व्यवस्था पर विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।”

फैसले के बाद उन्होंने न्यायपालिका के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने धैर्य नहीं खोया। उनका दावा है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप उन्हें बदनाम करने की साजिश का हिस्सा थे। उन्होंने कहा कि न्यायालय का निर्णय इस बात का संदेश देता है कि किसी पर आरोप लगना और न्यायालय में आरोप सिद्ध होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।

उन्होंने बताया कि इस लंबे कानूनी संघर्ष के दौरान उनके परिवार को भी कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन परिवार ने हर परिस्थिति में उनका साथ दिया। अब न्यायालय का फैसला आने के बाद परिवार में खुशी का माहौल है।

अंत में मकबूल आलम ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी आरोप या विवाद का अंतिम निर्णय कानून और न्यायालय के माध्यम से ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि फैसला आने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी मानकर उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस नहीं पहुंचानी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि अब वे सामान्य सामाजिक जीवन में लौटकर पहले की तरह समाज के बीच सक्रिय रहना चाहते हैं।

> नोट: यह खबर मुख्य रूप से मोहम्मद मकबूल आलम के दावों और उनके द्वारा पत्रकारों को दिए गए बयान पर आधारित है। न्यायालय के फैसले के संबंध में उपलब्ध जानकारी भी उनके पक्ष के अनुसार प्रस्तुत की गई है।