मांझी (सारण), 19 सितंबर। सारण जिले के मांझी प्रखंड की 38 जीविका दीदियों ने आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। जागृति जीविका महिला विकास स्वावलंबी सहकारी समिति से जुड़ी ये दीदियां सतत जीविकोपार्जन योजना से जुड़ने से पहले देशी शराब और ताड़ी के पारंपरिक कारोबार से जुड़ी थीं
सरयू तट पर बसे बरेजा गांव में सिक्की घास प्रचुर मात्रा में मिलने से ये महिलाएं पहले से ही पारंपरिक डलिया बनाने में निपुण थीं, लेकिन बाजार और उचित मूल्य की कमी से जूझ रही थीं।
बजरंगबली समूह की सीता देवी बताती हैं कि स्थानीय स्तर पर बिक्री से लागत भी नहीं निकल पाती थी। इसके समाधान के लिए जिला एवं प्रखंड एसजेवाई टीम के मार्गदर्शन में ‘कुशाग्राम जीविका महिला सिक्की उत्पादक समूह’ का गठन किया गया।
प्रशिक्षण के बाद अब ये दीदियां डलिया के साथ-साथ पेन स्टैंड, सिक्की पोला चूड़ी, कानबाली, दुल्हन सेट चूड़ी, राखी और गिफ्ट आइटम जैसे आधुनिक उत्पाद बना रही हैं।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में समूह ने सरस मेला से 55,000 रुपये और सोनपुर मेले में 28,000 रुपये का कारोबार किया। पिछले रक्षाबंधन पर 10 रुपये प्रति राखी की दर से 20 से 22 हजार राखियों की बिक्री कर इन्होंने अच्छी कमाई के साथ सामाजिक पहचान भी बनाई।
उत्पादन में मुन्नी देवी, शारदा देवी, कमलावती, पुनीता, सीता, अनीता सहित बरेजा पंचायत की अन्य महिलाएं जुटी हैं, जबकि कुछ महिलाएं घास की कटाई और रंगाई से आय अर्जित कर रही हैं।
ग्रामीण विकास विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर का सरस मेला 20 से 29 सितंबर 2026 तक पटना के ज्ञान भवन परिसर में आयोजित होगा। प्रवेश निःशुल्क है। इस बार कुशाग्राम उत्पादक समूह का प्रतिनिधित्व बरेजा की पुष्पा देवी और धानमुनि देवी करेंगी।
जीविका सारण के जिला परियोजना प्रबंधक, अरुण कुमार ने कहा, “एसजेवाई का उद्देश्य अत्यंत निर्धन परिवारों को सम्मानजनक आजीविका से जोड़ना है। ताड़ी एवं देशी शराब जैसे व्यवसाय को छोड़कर लुप्त हो रही सिक्की कला को पुनर्जीवित कर उसे बाजार से जोड़ना काबिले तारीफ है। सरस मेला जैसे मंच इन दीदियों को लोकल से ग्लोबल तक ले जाने का काम करेंगे।”










