हमारी संस्कृति की धरोहर हाथी विहीन रहा छतर मेला 2022

सोनपुर गजेंद्र मोक्ष घाट पर 2019 में प्रशासन द्वारा गाजे-बाजे के साथ हाथियों को जल कीड़ा कराया गया था।

न्यूज4बिहार/सोनपुर– विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला जहां कभी एक बड़े भूभाग में गजराजो का जलवा हुआ करता था । विश्व के विभिन्न देशों के पर्यटक खासकर एक साथ सैकड़ों की संख्या में हाथी देखने के लिए सोनपुर मेला आते थे । यहां करोड़ो रुपए का सिर्फ हाथी का व्यापार होता था ।
हाथियों का भारतीय सभ्यता से हजारों वर्ष पुराना और बहुत गहरा संबंध रहा है । अभी भी हाथियों का प्रयोग मंदिरों, शादी बरात एवं जंगलात के काम में होता है । हाथियों को हम जिस प्रकार से पवित्र मानकर हम अपने धर्म और संस्कृति में सम्मान देते हैं ,उसी प्रकार से हमें इन जंगली हाथियों के साथ भी सही बर्ताव करना चाहिए ।
वन विभाग का कहना है कि जंगली हाथी नियंत्रर खतरे में है। इसके दांत की तस्करी के लिए अवैध शिकार मुख्य खतरा बन गया है । इसके बहुमूल्य दातों का प्रयोग पूर्वी देशों में अनेक रूपों में किया जाता है । जापान में विस्तृत व्यापार और व्यवहार कीमती आभूषण और नाम की मोहर बनाने के लिए किया जाता है । एक समय था कि हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला के मीना बाजार जहां कभी एक से बढ़कर एक स्वेटर तथा गर्म कपड़ा का व्यापार आते थे । वहां सड़क पर बहुत सा बोर्ड लगा रहता था –“यहा हाथी का दांत बिकता है ” । अब यह सब आकाश कुसुम के साथ-साथ गूलर का फूल बन गया है ।
हाथी हमारी राष्ट्रीय धरोहर है और भगवान गणेश की निशानी है। ऐसी स्थिति में जहां लाखों लोग इनके दर्शन मात्र के लिए छतर मेला आते हैं। मेले में इनके लाने पर प्रतिबंध लगाना किसी भी दृष्टिकोण से भारत जैसे धर्म प्रधान देश के लिए उचित नहीं है । अगर बिना सोचे समझे या बिना गहन अध्ययन किए कानून बना भी दिया गया है तो संशोधन की जरूरत है । वर्ष 2019 की मेला में यहां के तत्कालीन प्रशासन के मनमर्जी से मेले में समस्तीपुर, वैशाली ,सिवान ,गोपालगंज और पटना जिले से हाथी मंगवा कर पूर्णिमा के दिन गाजे बाजे के साथ तिरंगा लहराते हुए इन गजराजो को गजेंद्र मोक्ष घाट नारायणी में पवित्र स्नान कराया गया था । ये गजराज जल कीड़ा भी खूब किए थे । इस दृश्य को हजारों देशी-विदेशी अपने कैमरे और मोबाइल में इस दृश्य को कैद किया था । मेले के इतिहास में वर्ष 2022 का मेला हाथी विहीन रहा । इसका मलाल हर किसी को है और रहेगा । गजराज का दर्शन तक के लिए सोनपुर मेले में लाने की अनुमति नहीं देना आश्चर्य की बात है ।

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