पटना | News4Bihar | बिहार में आगामी पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी बीच राज्य सरकार ने ग्राम पंचायतों के गठन और परिसीमन (Delimitation) को लेकर बड़ा फैसला लिया है। पंचायती राज विभाग ने बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 11(1) के तहत 13 सूत्रीय नई गाइडलाइन जारी कर दी है। अब पूरे राज्य में इन्हीं नियमों के आधार पर पंचायतों का पुनर्गठन और परिसीमन किया जाएगा।
सरकार के मुताबिक पंचायत क्षेत्रों का निर्धारण वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर होगा। सभी ग्राम पंचायतों का गठन राजस्व ग्रामों के अनुसार नए सिरे से किया जाएगा और प्रत्येक प्रखंड को परिसीमन की अलग इकाई माना जाएगा।
नई गाइडलाइन के अनुसार परिसीमन की प्रक्रिया प्रखंड के उत्तर-पश्चिमी हिस्से से शुरू होकर दक्षिण-पूर्व दिशा तक पूरी की जाएगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी गांव का अनावश्यक विभाजन नहीं होगा। जहां तक संभव होगा, पूरे गांव को एक ही पंचायत के रूप में रखा जाएगा।
यदि किसी पंचायत में एक से अधिक गांव शामिल होंगे तो पंचायत मुख्यालय सबसे अधिक आबादी वाले गांव में बनाया जाएगा। वहीं, यदि किसी पंचायत क्षेत्र में SC, ST और पिछड़ा वर्ग की आबादी 50 प्रतिशत से अधिक है, तो मुख्यालय उस गांव में होगा जहां इन वर्गों की आबादी का अनुपात सबसे ज्यादा होगा।
पंचायत का नाम मुख्यालय वाले गांव के नाम पर रखा जाएगा। परिसीमन के दौरान प्राकृतिक सीमाओं, सड़क, रेलवे लाइन और अन्य सार्वजनिक स्थलों को भी सीमा निर्धारण का आधार बनाया जाएगा।
सरकार ने जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रारूप प्रकाशित कर 15 दिनों तक सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित करने का भी फैसला किया है। आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम अधिसूचना जिला गजट में प्रकाशित की जाएगी।
सरकार की 13 बड़ी गाइडलाइन एक नजर में
– 2011 की जनगणना के आधार पर होगा परिसीमन।
– प्रत्येक प्रखंड को अलग इकाई माना जाएगा।
– पंचायतों का गठन राजस्व ग्रामों के अनुसार होगा।
– उत्तर-पश्चिम से शुरू होकर दक्षिण-पूर्व तक चलेगी प्रक्रिया।
– गांवों का अनावश्यक विभाजन नहीं होगा।
– अधिक आबादी वाले गांव में बनेगा पंचायत मुख्यालय।
– SC/ST एवं पिछड़ा वर्ग की आबादी 50% से अधिक होने पर विशेष प्रावधान लागू होगा।
– पंचायत का नाम मुख्यालय वाले गांव के नाम पर होगा।
– सड़क, रेलवे लाइन और प्राकृतिक सीमाओं को प्राथमिकता मिलेगी।
– प्रमंडलीय आयुक्त पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।
– 15 दिनों तक सुझाव और आपत्तियां मांगी जाएंगी।
– जिलाधिकारी आपत्तियों का निपटारा करेंगे।
– अंतिम अधिसूचना जिला गजट में प्रकाशित होगी।
कुल मिलाकर, सरकार की इस नई अधिसूचना के साथ बिहार में पंचायत परिसीमन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। अब आगामी पंचायत चुनाव से पहले सभी जिलों में नए नियमों के तहत पंचायतों का अंतिम निर्धारण किया जाएगा।










