रूपेश मिश्रा | कटिहार बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच कटिहार जिले में स्वास्थ्य विभाग ने राहत एवं चिकित्सा व्यवस्था को पूरी तरह सक्रिय रखा है। सड़क संपर्क प्रभावित होने वाले इलाकों में अब नाव के जरिए स्वास्थ्यकर्मी, दवाएं और जरूरी चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 24 मेडिकल कैंप संचालित किए जा रहे हैं, जबकि कुरसेला, अहमदाबाद, मनिहारी और बरारी में चार बोट की व्यवस्था की गई है। इन सेवाओं के माध्यम से अब तक 1700 से अधिक लोगों को उपचार उपलब्ध कराया जा चुका है।
बुधवार को बिहार सरकार के आपदा मंत्री रत्नेश सादा ने जिले के विभिन्न बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर मेडिकल कैंप, बोट क्लीनिक और स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया। उन्होंने आपदा की इस चुनौतीपूर्ण घड़ी में स्वास्थ्य विभाग की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी
बाढ़ के दौरान गर्भवती महिलाओं को समय पर सुरक्षित स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सितंबर और अक्टूबर में संभावित प्रसव वाली महिलाओं की प्रखंडवार लाइन लिस्टिंग तैयार की गई है। अहमदाबाद में 29, आजमनगर में 165, बलरामपुर में 149 और बरारी में 110 गर्भवती महिलाओं को विशेष निगरानी में रखा गया है। स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देश दिया गया है कि प्रसव की संभावित तिथि से पहले महिलाओं को सुरक्षित रूप से स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाया जाए।
सर्पदंश और जलजनित बीमारियों से बचाव की तैयारी
बाढ़ प्रभावित इलाकों में सर्पदंश और कुत्ता काटने की दवाओं के साथ ब्लीचिंग पाउडर, हैलोजन टैबलेट समेत अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से लोगों को जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है। लोगों से पानी उबालकर पीने, भोजन को ढककर रखने और बासी भोजन से बचने की अपील की जा रही है।
करीब 2000 गर्भवती महिलाओं की हुई जांच
बाढ़ के बावजूद प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच जारी रही। अभियान में 21 हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली एनीमिक महिलाओं को चिह्नित कर स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाया गया और चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार उपचार दिया गया। वहीं, तीन एनीमिया से ग्रसित धात्री महिलाओं को भी विशेष स्वास्थ्य सुविधा दी गई। जिले के विभिन्न प्रखंडों में करीब 2000 गर्भवती महिलाओं की ANC जांच की गई।
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बाढ़ जैसी विषम परिस्थितियों में भी स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित नहीं होने दिया जाएगा। एम्बुलेंस, बोट एम्बुलेंस, मेडिकल कैंप और मैदानी स्वास्थ्यकर्मियों के माध्यम से जरूरतमंद लोगों तक लगातार चिकित्सा सुविधा पहुंचाई जा रही है।










