डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती पर प्रतिभाओं को मिला बिहार ज्योति अवार्ड

♦ ग्रामीण विकास एवं जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली हस्तियों को किया सम्मानित

 

पटना। बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर बिहार कला व सांस्कृतिक विकास परिषद की ओर से पटना के इनकम टैक्स, किदवईपुरी स्थित परिसर में समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर संगोष्ठी, पुष्पांजलि एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के योगदान को याद किया गया। समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को ‘बिहार ज्योति अवार्ड’ से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में बिहार सरकार के ग्रामीण विकास एवं जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह की अध्यक्षता कला प्रेमी एवं वरिष्ठ पत्रकार विश्वमोहन चौधरी संत ने की। इस दौरान डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। संत, समाजसेवी एवं रंगकर्मी अशोक सिन्हा, डॉ. दिवाकर तेजस्वी सहित कई कलाकारों और कला प्रेमियों ने भी पुष्पांजलि अर्पित की।

समारोह के दौरान आयोजित संगोष्ठी में बिहार के विकास में डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के योगदान पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने उनके नेतृत्व, जनसेवा और राज्य के विकास में उनकी भूमिका को याद करते हुए उनके विचारों और कार्यों से प्रेरणा लेने की आवश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर मंत्री श्रवण कुमार ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली प्रतिभाओं को प्रतीक चिह्न, शॉल एवं सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रदीप उपाध्याय, शिक्षा के क्षेत्र में नुसरत जहां, सिलाई कला के लिए दिव्यांग उषा कुमारी, शास्त्रीय गायन के लिए शर्मिष्ठा, शैक्षणिक निर्देशन के लिए मौली सिंह, निर्देशन कला के लिए कृष्णजी शर्मा शालीमार, साहित्य सेवा के लिए डॉ. उषा पांडेय ‘शुभांगी’ तथा लेखक एवं नाटककार डॉ. अरविंद अक्कू शामिल रहे।

समारोह के अंतिम चरण में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें एलिजा बानो, शर्मिष्ठा, शालीमार, अशोक, उषा, दिव्या मोहन, शोभराज, मुन्ना, अशोक चंचल, अरुण कुमार गौतम और हरिकिशोर सिंह मुन्ना सहित अन्य कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से उपस्थित लोगों का मनोरंजन किया। कार्यक्रम में साहित्य, कला, संस्कृति और सामाजिक सेवा से जुड़े लोगों की सहभागिता रही।