सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एकमा में शुद्ध पेयजल का संकट, मरीज व तीमारदार परेशान

एकमा (सारण)। सारण जिले के एकमा प्रखंड मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एकमा में इन दिनों शुद्ध पेयजल का गंभीर संकट बना हुआ है। अस्पताल में आने वाले मरीजों, गर्भवती महिलाओं, उनके परिजनों, चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों और अन्य लोगों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। अस्पताल परिसर में पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं होने से मरीजों और परिजनों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

अस्पताल परिसर के बाहर मुख्य गेट के समीप इंडिया मार्का हैंडपंप लगा हुआ है, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार उससे निकलने वाला पानी अत्यधिक आयरनयुक्त है। बताया जाता है कि हैंडपंप से पानी निकालकर करीब आधे घंटे से एक घंटे तक रखने पर उसका रंग बदलने लगता है। पानी के रंग में बदलाव आने के बाद वह पीने योग्य नहीं रह जाता। लोगों का कहना है कि यह पानी अशुद्ध है और इसका नियमित सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से नुकसानदायक हो सकता है।

 

मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन द्वारा शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अस्पताल परिसर के अंदर आधुनिक तकनीक वाला आरओ प्लांट लगाया गया है। लेकिन यह आरओ प्लांट करीब एक पखवाड़ा से खराब पड़ा हुआ है। इसके कारण मरीजों, उनके परिजनों, अस्पताल प्रशासन के अधिकारियों, डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को भी बाजार से महंगे दामों पर बोतलबंद पानी खरीदकर पीने को विवश होना पड़ रहा है।

अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों के साथ रहने वाले परिजनों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। कई लोग बाजार से बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हैं, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के परिजनों के लिए यह अतिरिक्त खर्च परेशानी का कारण बन रहा है। गर्भवती महिलाओं और प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं के परिजनों को भी पानी की व्यवस्था करने में काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।

 

स्थानीय लोगों का आरोप है कि खराब पड़े वॉटर प्यूरीफायर यानी आरओ प्लांट की मरम्मत की दिशा में अस्पताल प्रशासन और विभागीय अधिकारी उदासीन बने हुए हैं। लंबे समय से प्लांट खराब रहने के बावजूद इसकी मरम्मत नहीं कराई गई है। इससे अस्पताल में आने वाले लोगों को मजबूरी में असुरक्षित हैंडपंप का पानी इस्तेमाल करना पड़ रहा है या फिर बाजार से पानी खरीदना पड़ रहा है।

 

उल्लेखनीय है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एकमा में ओपीडी के अलावा 24 घंटे इमरजेंसी सेवा और 24 घंटे प्रसव की सुविधा विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई है। ऐसे में अस्पताल में दिन-रात मरीजों और उनके परिजनों की आवाजाही रहती है। प्रसव के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं, इमरजेंसी मरीजों और उनके साथ रहने वाले परिजनों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। बाजार से महंगे दामों पर पानी खरीदकर पीना उनकी मजबूरी बन गई है।

 

मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर शुद्ध पेयजल की व्यवस्था हर समय उपलब्ध रहनी चाहिए। लेकिन लंबे समय से यहां पीने के पानी की समस्या बनी हुई है। इससे अस्पताल में भर्ती मरीजों के साथ-साथ ओपीडी में आने वाले लोगों को भी परेशानी हो रही है। आमडाढी पंचायत के पूर्व मुखिया ओम प्रकाश सिंह ने बताया कि विशेषज्ञों का कहना है कि दूषित या आर्सेनिकयुक्त पानी के सेवन से संक्रमण, पेट संबंधी बीमारी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी बना हुआ रहता है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन पहुंचते हैं। ऐसे में पेयजल की व्यवस्था बाधित रहने से विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को अधिक परेशानी होती है। आम लोगों, मरीजों व स्वास्थ्य कर्मियों ने मांग की है कि अस्पताल परिसर में तत्काल शुद्ध पेयजल की व्यवस्था कराई जाए और खराब पड़े आरओ प्लांट की शीघ्र मरम्मत कराकर उसे चालू किया जाए।

 

लोगों का कहना है कि यदि हैंडपंप के पानी में आर्सेनिक और अत्यधिक आयरन की मात्रा पाई जा रही है तो संबंधित विभाग द्वारा पानी की जांच कराई जानी चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर हैंडपंप की मरम्मत कर उसमें आयरनयुक्त पानी को शुद्ध करने वाली तकनीक लगाई जाए। साथ ही अस्पताल परिसर में पर्याप्त संख्या में वाटर प्यूरीफायर, आरओ प्लांट या सुरक्षित पेयजल केंद्र स्थापित किए जाएं, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को बाजार से पानी खरीदने के लिए मजबूर न होना पड़े।

 

जनहित में लोगों ने जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन से मांग की है कि अस्पताल परिसर में शुद्ध पेयजल की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। खराब पड़े आरओ प्लांट को तत्काल ठीक कराया जाए, हैंडपंप के पानी की गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच कराई जाए और यदि पानी दूषित पाया जाता है तो उसके उपयोग पर रोक लगाई जाए। लोगों का कहना है कि अस्पताल में इलाज और प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ मरीजों और उनके परिजनों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना भी प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि पानी की समस्या को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। जल्द ही अस्पताल परिसर में मरीजों और तीमारदारों के लिए शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।