नई दिल्ली | सुरसागर संगीत महाविद्यालय का सांस्कृतिक कार्यक्रम सम्पन्न

  • संगीत, संस्कृति और परंपरा की प्रस्तुतियों ने बांधा समां

नई दिल्ली | सुरसागर संगीत महाविद्यालय द्वारा मैथिली भोजपुरी अकादमी, दिल्ली एवं मुस्कान चैरिटेबल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम का रविवार को मुक्तधारा ऑडिटोरियम, गोल मार्केट, नई दिल्ली में सफल आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. महेंद्र प्रसाद सिंह उपस्थित रहे। इस अवसर पर डॉ. संतोष पटेल, सुशीला गुप्ता, विजय कुमार यादव, सीमा रंगा इंद्रा एवं डॉ. मनोज कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में संगीत एवं संस्कृति से जुड़ी विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक परंपरा की विविधता को प्रस्तुत किया गया। सुरसागर संगीत महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों की सराहना प्राप्त की। कार्यक्रम का उद्देश्य संगीत के माध्यम से सांस्कृतिक मूल्यों, अनुशासन और संवेदनशीलता को बढ़ावा देना रहा।

सुरसागर संगीत महाविद्यालय के संस्थापक एवं निदेशक श्री अनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि संगीत केवल कला का अभ्यास नहीं, बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व और संस्कारों के निर्माण का माध्यम है। महाविद्यालय का मूल विचार “स्वर से ईश्वर की ओर” है और इसी भावना के साथ विद्यार्थियों को संगीत एवं अन्य कलाओं का प्रशिक्षण दिया जाता है।

वर्ष 2001 में स्थापित सुरसागर संगीत महाविद्यालय गुरुकुल परंपरा और आधुनिक शिक्षण पद्धति के समन्वय से संगीत एवं कलाओं की शिक्षा प्रदान कर रहा है। संस्थान में शास्त्रीय गायन, तबला, हारमोनियम, बाँसुरी, गिटार, कीबोर्ड, ढोलक, ड्रम्स, कथक एवं योग सहित विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण दिया जाता है।

कार्यक्रम के दौरान श्री अनिल कुमार गुप्ता द्वारा रचित ‘राग धरोहर’ पुस्तक का भी उल्लेख किया गया। यह पुस्तक भारतीय शास्त्रीय संगीत के व्यावहारिक अध्ययन पर केंद्रित है, जिसमें प्रमुख रागों के आरोह, अवरोह, पकड़ और बंदिशों का क्रमबद्ध विवरण दिया गया है। पुस्तक विद्यार्थियों के व्यावहारिक संगीत ज्ञान और साधना में सहायक होने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित अतिथियों, कलाकारों, विद्यार्थियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।