News4Bihar | Desk | बिहार में निजी स्वास्थ्य सेवाओं को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब सिर्फ बड़े अस्पताल ही नहीं, बल्कि 1 से 40 बेड तक के छोटे अस्पताल, क्लीनिक, डिस्पेंसरी, डेंटल क्लीनिक और जांच केंद्रों के लिए भी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है।
राज्य सरकार ने इसके लिए “बिहार लघु एवं मध्यम स्वास्थ्य सेवा प्रतिष्ठान विनियमावली, 2026” लागू की है। नई व्यवस्था का उद्देश्य बिना मानक और मनमाने ढंग से संचालित हो रहे निजी स्वास्थ्य केंद्रों पर निगरानी बढ़ाना और मरीजों को सुरक्षित व बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है।
अब तक केवल 40 बेड से अधिक वाले अस्पतालों को वर्ष 2013 की नियमावली के तहत पंजीकरण कराना जरूरी था। लेकिन छोटे अस्पताल और क्लीनिक लंबे समय से बिना किसी सख्त नियमन के चल रहे थे। नई विनियमावली लागू होने के बाद छोटे स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों को भी तय मानकों का पालन करना होगा।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, रजिस्ट्रेशन के दौरान अस्पतालों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं, चिकित्सकीय संसाधनों, स्वच्छता व्यवस्था और सुरक्षा मानकों की जांच की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई भी संभव होगी।
सरकार का कहना है कि इस कदम से फर्जी या संसाधनहीन अस्पतालों पर रोक लगेगी, स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और मरीजों का भरोसा मजबूत होगा। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकार इसे निजी चिकित्सा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम पहल मान रहे हैं।










