बिहार मंत्रिमंडल में मिथिला, तिरहुत, मगध और अंग क्षेत्र का दबदबा, जाने…

  News4Bihar | पटना : बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल विस्तार में क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश दिखाई दी है। हालांकि इस विस्तार में मिथिला, तिरहुत, मगध और अंग क्षेत्र का सबसे अधिक दबदबा देखने को मिला है। इन चार क्षेत्रों से सबसे ज्यादा मंत्रियों को जगह दी गई है।

 

मंत्रिमंडल में कुल 35 मंत्री शामिल किए गए हैं, जबकि राज्य के 24 जिलों को प्रतिनिधित्व मिला है। वहीं 14 जिले अब भी मंत्री पद से वंचित रह गए हैं। सरकार गठन के 21 दिनों बाद हुए इस विस्तार को सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण साधने की कोशिश माना जा रहा है।

 

  • किस क्षेत्र से कितने मंत्री बने

मिथिला से सबसे ज्यादा 7 मंत्री

मिथिला क्षेत्र से सात नेताओं को मंत्री बनाया गया है। इनमें मधुबनी, दरभंगा, बेगूसराय और समस्तीपुर जिलों के विधायक शामिल हैं। मधुबनी से सबसे अधिक तीन मंत्रियों को जगह मिली है।

 

तिरहुत और मगध से 6-6 मंत्री

तिरहुत और मगध क्षेत्र से छह-छह मंत्री बनाए गए हैं। वैशाली जिले से तीन नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है, जबकि मुजफ्फरपुर और शिवहर को भी प्रतिनिधित्व मिला है। मगध क्षेत्र में पटना, नालंदा, शेखपुरा, गया और जहानाबाद के नेताओं को मौका मिला है।

अंग क्षेत्र से भी 6 मंत्री

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अंग क्षेत्र से भी छह मंत्री बनाए गए हैं। मुंगेर, लखीसराय, जमुई और भागलपुर के नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह मिली है।

 

शाहाबाद से 3, कोसी और सीमांचल से 2-2 मंत्री

शाहाबाद क्षेत्र से तीन मंत्री बनाए गए हैं, जबकि कोसी और सीमांचल क्षेत्र से दो-दो नेताओं को मंत्री पद मिला है। पश्चिम चंपारण से एक मंत्री बनाया गया है।

 

इन जिलों को अब भी इंतजार

राज्य के कई जिलों को इस बार भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल सकी। इनमें औरंगाबाद, अरवल, नवादा, रोहतास, बक्सर, बांका, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, सारण, सीवान, कटिहार, अररिया, मधेपुरा और खगड़िया शामिल हैं।

 

राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश

विशेषज्ञों का मानना है कि मंत्रिमंडल विस्तार में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए संतुलन बनाने का प्रयास किया गया है। कई पुराने चेहरों को दोबारा मौका मिला है, वहीं कुछ नए नेताओं को भी मंत्री पद देकर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की गई है।