• किशोरियों-महिलाओं में खून की कमी दूर करने की मुहिम तेज
• जांच से इलाज और निगरानी तक पूरी व्यवस्था
छपरा। अनीमिया पर अब केवल आयरन की गोली देने तक सीमित नहीं रहेगा इलाज। विशेष अभियान में मध्यम और गंभीर अनीमिया से पीड़ित मिलने वाले लाभार्थियों की पहचान के बाद उनकी आवश्यक जांच, उपचार, परामर्श और नियमित अनुवर्ती कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। 25 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक चल रहे ‘अनीमिया मुक्त बिहार विशेष अभियान’ में किशोरियों और महिलाओं को प्राथमिकता देते हुए सभी आयु वर्ग के लोगों की जांच की जा रही है। इसी क्रम में राज्य स्वास्थ्य समिति के अपर कार्यपालक निदेशक डॉ. अनुपमा सिंह ने मध्यम एवं गंभीर अनीमिक लाभार्थियों के शत-प्रतिशत उपचार और समुचित प्रबंधन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
पत्र में कहा गया है कि अनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत अब टेस्ट, ट्रीट, टॉक और ट्रेस की रणनीति के आधार पर लाभार्थियों का प्रबंधन किया जाना है। यानी अनीमिया की पहचान के बाद केवल आयरन-फोलिक एसिड की गोली या सिरप उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि हीमोग्लोबिन स्तर के अनुसार उपचार, पोषण संबंधी परामर्श और बाद में लाभार्थी की स्थिति की निगरानी भी की जाएगी।
गंभीर अनीमिया में होगी विस्तृत जांच
गंभीर अनीमिया के मामलों में आवश्यकतानुसार विस्तृत जांच कराने पर जोर दिया है। स्क्रीनिंग में गंभीर अनीमिया पाए जाने पर हीमोग्लोबिन, सीबीसी, सीरम फेरिटिन, सीरम विटामिन बी-12, टी3/टी4/टीएसएच और टीआईबीसी जैसी जांच कराने का निर्देश दिया गया है। उपचार शुरू करने के एक महीने बाद भी यदि लाभार्थी की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होता है तो केवल पोषण संबंधी कारण मानकर उपचार जारी नहीं रखा जाएगा। ऐसे मामलों में अनीमिया के दूसरे संभावित कारणों की पहचान के लिए स्वास्थ्य संस्थानों में बिहार सरकार की निःशुल्क पैथोलॉजी जांच सेवाओं के माध्यम से आवश्यक अतिरिक्त जांच कराई जाएगी और रिपोर्ट के आधार पर आगे का उपचार किया जाएगा।
मध्यम और गंभीर मरीजों का तय प्रोटोकॉल से होगा इलाज
सभी आयु वर्गों में मध्यम एवं गंभीर अनीमिया से पीड़ित लाभार्थियों के उपचार के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से वर्ष 2026 में जारी अनीमिया मुक्त भारत 2.0 दिशा-निर्देश के अनुरूप उपचार करने को कहा गया है। इसके लिए संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों को संलग्न उपचार फ्लो-चार्ट के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। अभियान के तहत डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर से जांच करने के साथ-साथ आयरन-फोलिक एसिड की गोली या सिरप का अनुपूरण भी जारी रहेगा। स्वास्थ्य विभाग का जोर इस बात पर है कि जांच में सामने आने वाले मध्यम और गंभीर मामलों का उपचार बीच में न छूटे और प्रत्येक लाभार्थी को आवश्यकता के अनुसार आगे की सेवाएं मिलती रहें।
खान-पान को लेकर भी होगा जागरूकता अभियान
अनीमिया के उपचार के साथ इसकी रोकथाम पर परामर्श को भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। जांच में अल्प, मध्यम अथवा गंभीर अनीमिया से ग्रसित पाए गए लाभार्थियों को आयरन से भरपूर संतुलित आहार, आयरन एवं विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थ, भोजन से जुड़े भ्रम और भ्रांतियों तथा आयरन अनुपूरण के महत्व के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके लिए आरबीएसके के चलंत चिकित्सा दल, एएनएम, सीएचओ और आरएमएनसीएच+ए काउंसलर को जिम्मेदारी दी गई है। स्वास्थ्यकर्मी लाभार्थियों और उनके परिवारों को खान-पान में जरूरी बदलाव तथा आयरन युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन के बारे में समझाएंगे, ताकि उपचार के साथ पोषण संबंधी कमियों को भी दूर किया जा सके।
पोर्टल पर दर्ज होगा हर जांच का आंकड़ा
डीपीएम अरविन्द कुमार ने बताया कि अभियान के दौरान होने वाली अनीमिया जांच के आंकड़ों को एएमबी अभियान पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य किया गया है। राज्य स्वास्थ्य समिति ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्तर और किसी भी आयु वर्ग में की गई अनीमिया जांच का आंकड़ा जांच कर्मियों द्वारा ही पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी को प्रखंड स्तर पर समन्वय स्थापित कर संबंधित जांच कर्मियों का यूजर आईडी तैयार कराने और पोर्टल पर आंकड़े अपलोड करने में आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई है। इससे अभियान के दौरान कितने लोगों की जांच हुई, कितने लोग अनीमिक पाए गए और कितने लाभार्थियों का उपचार शुरू हुआ, इसकी निगरानी और समीक्षा में सुविधा होगी।
उपचार की पूरी कड़ी सुनिश्चित करने का निर्देश
सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने कहा कि मध्यम एवं गंभीर अनीमिया से पीड़ित लाभार्थियों की पहचान के बाद जांच, उपचार, परामर्श और अनुवर्ती कार्रवाई की पूरी कड़ी सुनिश्चित की जाए। अभियान के दौरान सामने आने वाले मामलों को केवल आंकड़ों तक सीमित न रखते हुए उनका उचित प्रबंधन करने पर विशेष जोर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग के इस निर्देश का उद्देश्य अनीमिया की पहचान के बाद उपचार में होने वाली देरी को कम करना और गंभीर मामलों में बीमारी के मूल कारण तक पहुंचकर प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करना है। खासकर किशोरियों और महिलाओं में अनीमिया की समस्या को ध्यान में रखते हुए अभियान के दौरान स्क्रीनिंग और परामर्श गतिविधियों को व्यापक स्तर पर संचालित करने की तैयारी है।










