बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था ने जीता माताओं का भरोसा, सारण में सुरक्षित प्रसव की बड़ी छलांग

• संस्थागत प्रसव 73 से बढ़कर 83.5 फीसदी हुआ

• प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की देखरेख में प्रसव बढ़े

• सिजेरियन प्रसव की सुविधा में भी हुआ विस्तार

• एनएफएचएस-6 के आंकड़ों में खुलासा

छपरा। सारण जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण का सकारात्मक असर अब आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है। जिले में महिलाओं का प्रसव के लिए स्वास्थ्य संस्थानों पर भरोसा बढ़ा है, जिसके परिणामस्वरूप संस्थागत प्रसव में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (एनएफएचएस-6) के हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार सारण में संस्थागत प्रसव का प्रतिशत 73 से बढ़कर 83.5 प्रतिशत हो गया है। यानी एनएफएचएस-5 की तुलना में जिले में संस्थागत प्रसव में 10.5 प्रतिशत अंक की वृद्धि हुई है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (2019-21) के दौरान सारण जिले में 73 प्रतिशत प्रसव स्वास्थ्य संस्थानों में हुए थे। वहीं एनएफएचएस-6 (2023-24) के आंकड़ों के अनुसार अब 83.5 प्रतिशत महिलाओं का प्रसव स्वास्थ्य संस्थानों में हो रहा है। यह बदलाव जिले में सुरक्षित मातृत्व को लेकर बढ़ती जागरूकता के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच और सेवाओं में सुधार का संकेत माना जा रहा है।

सरकारी अस्पतालों की ओर बढ़ा महिलाओं का रुझान

सारण में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रति भी महिलाओं का भरोसा बढ़ा है। एनएफएचएस-5 के अनुसार जिले में 57.2 प्रतिशत प्रसव सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में हुए थे। एनएफएचएस-6 के आंकड़ों में यह प्रतिशत बढ़कर 64.3 प्रतिशत पहुंच गया है।सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव के आंकड़ों में वृद्धि को स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, रेफरल अस्पतालों और जिला स्तरीय स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास किए गए हैं।सरकारी संस्थानों में बेहतर सुविधाएं मिलने और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता बढ़ने से ग्रामीण एवं दूरदराज के क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं का रुझान भी संस्थागत प्रसव की ओर बढ़ा है।

प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की देखरेख में प्रसव बढ़े

सुरक्षित प्रसव के लिहाज से एक और महत्वपूर्ण सुधार प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की देखरेख में होने वाले प्रसव के आंकड़ों में देखा गया है। एनएफएचएस-5 में जहां 79.1 प्रतिशत प्रसव प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की सहायता से कराए गए थे, वहीं एनएफएचएस-6 में यह आंकड़ा बढ़कर 83.5 प्रतिशत हो गया है।प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की मौजूदगी में प्रसव होने से जटिल परिस्थितियों की समय पर पहचान और प्रबंधन संभव हो पाता है। इससे जरूरत पड़ने पर गर्भवती महिला को उच्च स्वास्थ्य केंद्र तक रेफर करने में भी मदद मिलती है।

सिजेरियन प्रसव की सुविधा में भी हुआ विस्तार

सारण में सिजेरियन प्रसव के प्रतिशत में भी वृद्धि दर्ज की गई है। एनएफएचएस-5 में जिले में सिजेरियन प्रसव का प्रतिशत 8 था, जो एनएफएचएस-6 में बढ़कर 12.9 प्रतिशत हो गया है।सिजेरियन प्रसव में वृद्धि को उन महिलाओं तक आवश्यक चिकित्सा सुविधा पहुंचने के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है, जिन्हें जटिल प्रसव की स्थिति में ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है। स्वास्थ्य संस्थानों में सर्जिकल और प्रसूति सेवाओं की उपलब्धता बढ़ने से जटिल प्रसव के मामलों का बेहतर प्रबंधन संभव हो रहा है।

सुरक्षित मातृत्व की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि

सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच, प्रसव पूर्व देखभाल, जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान, एंबुलेंस सुविधा और स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव सेवाओं को सुदृढ़ करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। आशा कार्यकर्ता और एएनएम भी गर्भवती महिलाओं को नियमित जांच कराने तथा सुरक्षित प्रसव के लिए स्वास्थ्य संस्थान पहुंचने के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। गांव स्तर पर गर्भवती महिलाओं की पहचान और उन्हें प्रसव पूर्व जांच से जोड़ने की प्रक्रिया ने भी संस्थागत प्रसव को बढ़ाने में मदद की है। एनएफएचएस-5 से एनएफएचएस-6 के बीच संस्थागत प्रसव में हुई 10.5 प्रतिशत अंक की वृद्धि सारण में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुरक्षित मातृत्व के प्रति बढ़ते भरोसे की एक महत्वपूर्ण तस्वीर पेश करती है।