■ छपरा में दो बीडीओ के घायल होने के बाद सुरक्षा का मुद्दा गरमाया, बिहारभर के अधिकारी काली पट्टी बांधकर कर रहे विरोध
News4Bihar छपरा। छपरा में विधि-व्यवस्था ड्यूटी के दौरान दो प्रखंड विकास पदाधिकारियों (बीडीओ) के गंभीर रूप से घायल होने की घटना के बाद बिहार में प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है। बिहार ग्रामीण विकास सेवा संघ (BRDSA) ने राज्य सरकार से बीडीओ की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की है। संघ के आह्वान पर 27 जुलाई से राज्यभर के बीडीओ नियमित सरकारी कार्यों का निर्वहन करते हुए काली पट्टी बांधकर प्रतीकात्मक विरोध दर्ज करा रहे हैं। इसुआपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी इं. सत्यम सिंह ने इसकी पुष्टि की है।
सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की मांग
संघ द्वारा राज्य सरकार को भेजे गए ज्ञापन में प्रत्येक प्रखंड कार्यालय में बॉडी प्रोटेक्टर, हेलमेट, शील्ड, लेग गार्ड सहित अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इसके साथ ही प्रत्येक बीडीओ के साथ कम-से-कम दो प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है, ताकि संवेदनशील ड्यूटी के दौरान अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
घायल अधिकारियों के लिए बीमा और निशुल्क इलाज की मांग
संघ ने मांग की है कि ड्यूटी के दौरान घायल होने वाले अधिकारियों का उच्च स्तरीय सरकारी अस्पतालों में निशुल्क उपचार कराया जाए। साथ ही उनके लिए विशेष बीमा एवं क्षतिपूर्ति नीति लागू की जाए। संगठन ने विधि-व्यवस्था से जुड़ी ड्यूटी के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने की भी मांग उठाई है।
छपरा घटना की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग
बिहार ग्रामीण विकास सेवा संघ ने छपरा की घटना की निष्पक्ष जांच कराने तथा इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। संघ का कहना है कि दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा विरोध
इसुआपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी इं. सत्यम सिंह ने बताया कि संघ के निर्णय के अनुसार 27 जुलाई से राज्यभर के सभी बीडीओ काली पट्टी बांधकर नियमित सरकारी कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रतीकात्मक विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार अधिकारियों की सुरक्षा, घायल बीडीओ के समुचित उपचार तथा अन्य मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती।










