डिप्टी सीएम से कृषि मंत्री तक: क्या बीजेपी में ‘साइडलाइन’ हो रहे हैं विजय कुमार सिन्हा?

News4Bihar: बिहार की राजनीति में इन दिनों एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है — विजय कुमार सिन्हा। कभी सत्ता के केंद्र में दिखने वाले विजय सिन्हा अब नई राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं। डिप्टी सीएम की कुर्सी छोड़ने के बाद उन्हें सम्राट सरकार में कृषि मंत्री की जिम्मेदारी मिली है, लेकिन इसी के साथ बीजेपी के अंदर और सियासी गलियारों में एक नई चर्चा तेज हो गई है — क्या विजय कुमार सिन्हा को धीरे-धीरे “साइडलाइन” किया जा रहा है?

दरअसल, विधायक दल की बैठक के दिन विजय कुमार सिन्हा का एक बयान काफी चर्चा में रहा था। उन्होंने कहा था कि “पार्टी को सत्ता में लाने के लिए वर्षों तक जमीन पर मेहनत की, पसीना और लहू बहाया है। फैसला कमांडर यानी शीर्ष नेतृत्व का है और हम गठबंधन धर्म निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” इतना ही नहीं, उन्होंने खुद सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव रखा था।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उस बयान में सिर्फ अनुशासन नहीं, बल्कि भीतर की पीड़ा भी झलक रही थी। क्योंकि लंबे समय से संगठन और सरकार दोनों में मजबूत पकड़ रखने वाले विजय सिन्हा को अचानक सत्ता के शीर्ष पद से हटाकर कृषि मंत्रालय तक सीमित कर दिया गया।

बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो पार्टी अब बिहार में नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में नेतृत्व की नई संरचना में कुछ पुराने चेहरों की भूमिका सीमित होती दिख रही है। हालांकि पार्टी का आधिकारिक रुख साफ है कि हर फैसला संगठन और गठबंधन की मजबूती के लिए लिया गया है।

लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण है या फिर एक सुनियोजित “साइडलाइन चक्रव्यूह”?
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि विजय सिन्हा की बढ़ती लोकप्रियता और संगठन में मजबूत पकड़ कुछ नेताओं को असहज कर रही थी।

फिलहाल विजय कुमार सिन्हा खुलकर कुछ नहीं कह रहे, लेकिन उनके हालिया बयान और बदली हुई राजनीतिक स्थिति ने बिहार बीजेपी के भीतर चल रही हलचल को जरूर उजागर कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि विजय सिन्हा खुद को फिर से सत्ता के केंद्र में स्थापित कर पाते हैं या नहीं।