अस्पताल में नहीं मिला इलाज | सड़क जाम कर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन

● पोखरे में डूबे मासूम की मौत, अस्पताल में नहीं मिला इलाज

●स्वास्थ्य व्यवस्था पर फूटा गुस्सा, 45 मिनट तक सड़क जाम कर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन

News4Bihar : सारण जिले के मशरक प्रखंड अंतर्गत पचखंडा गांव में रविवार को एक दर्दनाक हादसे में पोखरे में डूबने से 11 वर्षीय छात्र की मौत हो गई। घटना के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) मशरक में चिकित्सक के अनुपस्थित मिलने पर परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने करीब 45 मिनट तक सड़क जाम कर स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया और प्रशासन से लचर चिकित्सा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई।

मृतक की पहचान पचखंडा गांव निवासी मंटू शर्मा के पुत्र मनीष कुमार के रूप में हुई है। मनीष केंद्रीय विद्यालय मशरक में वर्ग-4 का छात्र था। हादसे के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

■ खेलते-खेलते पोखरे तक पहुंचे बच्चे, गहरे पानी में डूबा मनीष

स्थानीय लोगों के अनुसार, मनीष गांव के अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। इसी दौरान सभी बच्चे गांव के पीछे चंवर स्थित पोखरे के पास पहुंच गए। कुछ बच्चे पोखरे में नहाने लगे। नहाने के दौरान मनीष अचानक गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। साथ मौजूद बच्चों ने शोर मचाया तो आसपास के ग्रामीण दौड़कर पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने बच्चे को पानी से बाहर निकाला।

घटना की सूचना मिलते ही डायल-112 पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आनन-फानन में बच्चे को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मशरक पहुंची। आरोप है कि उस समय अस्पताल में कोई एमबीबीएस चिकित्सक मौजूद नहीं था। चिकित्सक के नहीं मिलने पर परिजनों और ग्रामीणों का आक्रोश भड़क उठा।

■ अस्पताल में हंगामा, स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी

ग्रामीणों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। लोगों का कहना था कि सीएचसी मशरक में चिकित्सकों की अनुपस्थिति और लापरवाही कोई नई बात नहीं है। यहां अक्सर मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिससे लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में केवल राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) से जुड़े आयुष चिकित्सक की ड्यूटी लगाई गई थी, जबकि आपातकालीन सेवा के लिए एमबीबीएस डॉक्टर मौजूद नहीं थे। ग्रामीणों ने बताया कि कुछ महीने पहले सारण जिलाधिकारी के निरीक्षण के दौरान अस्पताल में शिफ्टवार ड्यूटी रोस्टर लागू करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन उसका पालन नहीं हो रहा है।

■ सड़क जाम कर किया प्रदर्शन

घटना से नाराज ग्रामीणों ने सड़क जाम कर करीब 45 मिनट तक विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि अस्पताल में समय पर डॉक्टर मौजूद रहते तो बच्चे को तत्काल उपचार मिल सकता था। लोगों ने सारण जिलाधिकारी और सिविल सर्जन से सीएचसी मशरक की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा लापरवाह कर्मियों पर कार्रवाई की मांग की।

सूचना मिलने पर मशरक थाना पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर शांत कराया। थानाध्यक्ष अश्विनी कुमार तिवारी ने बताया कि मामले में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है तथा शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।

■ गांव में पसरा मातम

मृतक मनीष कुमार दो भाइयों में बड़ा था। बेटे की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मां आशा देवी का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि पिता गहरे सदमे में हैं। घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मृतक के घर पहुंचकर परिजनों को सांत्वना देने में जुटे रहे।

■ पोखरों की सुरक्षा को लेकर भी उठे सवाल

ग्रामीणों ने गांवों में स्थित पोखरों और जलाशयों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। लोगों का कहना है कि गर्मी के दिनों में बच्चे अक्सर तालाब और पोखरों में नहाने चले जाते हैं, जिससे हादसों की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जलाशयों के आसपास सुरक्षा इंतजाम करने और बच्चों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग की है।

घटना के बाद एक बार फिर सीएचसी मशरक की स्वास्थ्य व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।