● छपरा के संत पाकिस्तान में पूजे जाते हैं
● भक्तगण मार्ग को झाड़ू लगा पानी का छिड़काव कर शोभायात्रा की भव्यता बढ़ा रहे थे।
छपरा। श्री श्री 1008 श्री स्वामी अद्वैतानंद परमहंस दयाल स्वामी महाराज के जन्म स्थली दहीयावां छपरा में भव्य शोभा यात्रा का आयोजन हुआ जिसमें देश-विदेश से आए संत महात्मा एवं श्रद्धालु भक्तगणों ने शोभा यात्रा में स्वामी जी के चरित्र का व्याख्यान किया। शोभा यात्रा के लिए झाड़ू लगाकर सफाई एवं पानी का छिड़काव किया। झूमते नाचते गाते जन्म स्थली दहियावां से साहेबगंज सोनार पट्टी, मौना चौक होते हुए नारायण पैलेस पहुंची वहां जन्म उत्सव मनाया गया ।
स्वामी जी के विषय में धर्म प्रचारक अरुण पुरोहित ने बताया सारण की धरती संत महात्माओं एवं महापुरुषों की धरती है। इसी धारा धरातल पर सन 1846 में सरयू नदी के किनारे महर्षी दधिचि आश्रम के समीप दहियावां ब्राह्मण टोली में रामनवमी के दिन अवतरित हुए। रामनवमी के दिन जन्म होने के कारण इनका बचपन का नाम राम रूप रखा गया फिर राम नारायण और राम याद के नाम से जाने गए ।जब यह आठ माह के शिशु थे तभी माताजी का देहांत हो गया और पिता पाठक जी की चिंता बढ़ गई तुलसीराम पाठक के मित्र शिष्य तथा गुरु भाई थे लाल नरहरी प्रसाद श्रीवास्तव छपरा के नामी वकील थे ।लाल जी का शिशु पुत्र एक मां पहले गुजर चुका था ।संजोग जूटा और शिशु राम याद का पालन पोषण लाल जी के घर होने लगा 5 वर्ष बाद तुलसीराम पाठक का भी देहांत हो गया और कायस्थ दंपति पूर्ण रूपेण बालक राम याद के माता-पिता हो गए ।
बालक तुलसीराम पाठक और लाल नरहरी प्रसाद दोनों केदारघाट काशी के महान संत स्वामी जी के आध्यात्मिक शिष्य थे पाठक जी के देहांत के पश्चात स्वामी लाल नरहरी प्रसाद के यहां आते और प्रवास करते तथा बालक राम याद को बहुत प्यार करते हैं एवं हप्पू बाबा कहकर पुकारते बचपन में ही बालक राम याद स्वामी जी से दीक्षित हो गए थे जब बालक राम याद चार वर्ष के थे तभी उनकी शिक्षा शुरू हो गई और शाम को लाल देवी प्रसाद जी फारसी पढ़ते थे तथा प्रातः समय ग्राम खलपुरा निवासी भैरव शुक्ला संस्कृत पढ़ाते थे ।बालक राम याद अत्यंत कुशाग्र तथा मेधावी थे।
स्वामी जी पूरे देश का भ्रमण करते हुए भारत माता के अंतिम छोर पर कस्बा टेरी जिला कोहाट जो अब पाकिस्तान में है पहुंचे। छपरा के महान संत आज पाकिस्तान में पूजे जाते हैं। अपने जीवन काल में सैकडो शिष्य बनाया अब आज हजारों की संख्या में मठ मंदिर स्थापित कर सनातन धर्म के अद्वैत वेदांत का दर्शन करा रहे हैं। रौजा छपरा में ब्रह्म विद्यालय एवं आश्रम की स्थापना हुई। स्वामी जी का ननिहाल नंदग्राम कोपा में है।










