प्रभु राम के शरण में जाने से ही जीव का कल्याण होगा – विद्याभूषण जी महाराज

   News4Bihar | इसुआपुर । प्रखंड के उच्चतर माध्यमिक एवं मध्य विद्यालय इसुआपुर के परिसर में हो रहे तुलसी जयंती समारोह के दूसरे दिन मंगलवार की देर संध्या मढ़ौरा, सारण से पधारे संत विद्याभूषण जी महाराज उर्फ कवि जी ने अंगद चरित्र के माध्यम से जनमानस को बताया कि भगवान है, किंतु केवल भगवान के होने से ही जीव का कल्याण नहीं हो सकता। बल्कि जीव का कल्याण तभी होगा, जब वह भगवान की सत्ता को स्वीकार कर आत्म समर्पण करे। अर्थात भगवान के साथ अपना कोई ना कोई संबंध स्थापित करना होगा। अंगद ने अपने पिता बाली के माध्यम से भगवान राम की शरणागति स्वीकार की थी। परिणाम स्वरूप भगवान की शक्ति उनमें प्रकट हुई। तब लंका में कोई भी वीर उनका पैर नहीं उठा सका। अयोध्या से लौटते समय अंगद का हृदय फटने लगा। तब भगवान राम ने अपने हाथ से अंगद को सुसज्जित करके अपना स्वरूप प्रदान किया। हनुमान जी के मुख से अंगद की प्रार्थना सुनकर श्री राम जी प्रेम में भावविभोर हो गए। तात्पर्य यह कि जैसे अंगद ने भगवान की शरणागति स्वीकार की, वैसे ही जीव भी शरणागति स्वीकार करें। तभी जीव का कल्याण हो सकता है। समारोह का संचालन कमेटी के अध्यक्ष अमरनाथ प्रसाद, सचिव शिक्षक अनिल चौरसिया, कोषाध्यक्ष पिंटू कुमार सोनी ने किया। वहीं मंच संचालन शिक्षाविद् पंडित त्रिभुवन चतुर्वेदी ने किया।