News4Bihar | मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच बड़े युद्ध का खतरा गहराता जा रहा है। अमेरिका ने ईरान पर लगातार 12वीं रात हवाई हमले किए हैं। वहीं, दोनों देशों के बीच धमकियों और चेतावनियों का दौर भी तेज हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अमेरिका अपने रुख से पीछे नहीं हटेगा।
CENTCOM ने बताया हमले का मकसद
अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, ताजा हवाई हमले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर किए गए। अमेरिकी सेना का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उस सैन्य क्षमता को कमजोर करना है, जिससे वह क्षेत्र में गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बना रहा है।
CENTCOM ने संकेत दिया है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान आगे भी जारी रह सकता है। लगातार हो रहे हमलों के बीच दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
ईरान की खुली धमकी, आर्थिक ढांचे निशाने पर
ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि हालात में सुधार नहीं हुआ तो वह क्षेत्र के तेल ठिकानों, ऊर्जा परियोजनाओं और अन्य महत्वपूर्ण आर्थिक ढांचों को निशाना बना सकता है। तेहरान के इस रुख से खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है।
होर्मुज और बाब-अल-मंदेब पर बढ़ी चिंता
इस पूरे संकट का असर दुनिया के दो सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों—होर्मुज स्ट्रेट और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य—पर पड़ सकता है। इन समुद्री रास्तों से वैश्विक तेल और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही जुड़ी हुई है।
ईरान और उसके सहयोगियों की ओर से इन समुद्री मार्गों और क्षेत्रीय ऊर्जा ढांचे को लेकर दी जा रही चेतावनियों ने दुनिया भर में तेल आपूर्ति और वैश्विक व्यापार को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
क्या मिडिल ईस्ट बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है?
अमेरिका और ईरान के बीच लगातार सैन्य कार्रवाई, जवाबी धमकियों और समुद्री मार्गों को लेकर बढ़ते तनाव ने पूरे मिडिल ईस्ट को गंभीर संकट के मुहाने पर ला खड़ा किया है। फिलहाल दोनों पक्ष पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह संघर्ष सीमित सैन्य कार्रवाई तक रहेगा या फिर पूरे क्षेत्र को एक बड़े युद्ध में झोंक देगा।










