अब टेढ़े पैर नहीं बनेंगे भविष्य की बाधा, सदर अस्पताल में क्लबफुट का आधुनिक इलाज शुरू

》•पोंसेटी तकनीक से क्लबफुट का सफल उपचार

》•बिना बड़े ऑपरेशन के शुरू हुआ उपचार

》•विशेषज्ञ डॉ. रवि अमृत की देखरेख में हुई प्लास्टर कास्टिंग

 

छपरा, 08 जुलाई 2026: जन्म के समय पैरों की विकृति (क्लबफुट) से पीड़ित बच्चों के लिए सारण जिला अस्पताल में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। 1 जुलाई 2026 को जिला अस्पताल में जन्मजात क्लबफुट (Clubfoot) से प्रभावित बच्चों का उपचार विश्वस्तरीय पोंसेटी विधि (Ponseti Method) के माध्यम से शुरू किया गया। इस उपचार से ऐसे बच्चों को बिना बड़े ऑपरेशन के सामान्य जीवन जीने की नई उम्मीद मिली है।

 

विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. रवि अमृत के नेतृत्व में बच्चों के पैरों की विस्तृत जांच की गई। इसके बाद उनकी स्थिति के अनुसार क्रमिक (Serial) प्लास्टर कास्टिंग की प्रक्रिया अपनाई गई। इस विधि में हर सप्ताह प्लास्टर बदलते हुए पैरों की विकृति को धीरे-धीरे सही दिशा में लाया जाता है, जिससे अधिकांश मामलों में बड़े ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं पड़ती।

 

चिकित्सकों ने बताया कि पोंसेटी विधि को क्लबफुट के उपचार के लिए विश्वभर में ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ माना जाता है। यदि जन्म के तुरंत बाद या शुरुआती महीनों में उपचार शुरू कर दिया जाए, तो अधिकांश बच्चे सामान्य बच्चों की तरह चलने-फिरने और दैनिक जीवन की गतिविधियां करने में सक्षम हो जाते हैं।

 

उपचार अभियान में सामाजिक संस्थाओं का भी महत्वपूर्ण सहयोग मिला। वंशिता चौरसिया (अनुष्का फाउंडेशन) द्वारा 0 से 2 वर्ष तक के क्लबफुट से प्रभावित बच्चों के उपचार में उपयोग होने वाली आवश्यक सामग्री नि:शुल्क उपलब्ध कराई गई, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत मिली।

 

इस उपचार अभियान के तहत चार बच्चों का इलाज किया गया। इनमें अनिशा कुमारी (पिता– अभिषेक कुमार, माता– प्रियंका कुमारी, निवासी– पचौरार, छपरा), ब्यूटी कुमारी (पिता– राजकुमार, माता– रामवती कुमारी, निवासी– मांझी, छपरा), पीहू कुमारी (पिता– आनंद कुमार, माता– पूजा कुमारी, निवासी– दिघवारा, छपरा) तथा देवांशु कुमार (पिता– धर्मेंद्र कुमार, माता– रामवती देवी, निवासी– नगरा, छपरा) शामिल हैं।

 

वहीं, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) की टीम तथा DEIC (District Early Intervention Centre) के प्रभारी डॉ. जितेंद्र झा के सहयोग से बच्चों को आवश्यकतानुसार आगे के विशेष उपचार और फॉलो-अप के लिए जिला अस्पताल सीवान तक पहुंचाने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई।

 

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, क्लबफुट जन्मजात होने के बावजूद समय पर पहचान और नियमित उपचार से पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। ऐसे में अभिभावकों से अपील की गई है कि यदि नवजात शिशु के पैरों में किसी प्रकार की असामान्यता दिखाई दे तो बिना देर किए नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में चिकित्सकीय परामर्श लें, ताकि समय रहते उपचार शुरू कर बच्चे को सामान्य जीवन दिया जा सके।