सामान्य टीबी के मुकाबले काफी जटिल है डीआर-टीबी : डॉ. रत्नेश्वर

• रिच इंडिया संस्था के सहयोग से हुआ कार्यशाला
• डीआर-टीबी के मरीजों के लिए 9 माह से अधिक खानी पड़ती है दवा
• दवा सेवन में लापरवाही से होती है ड्रग रेजिस्टेंट टीबी
छपरा। यक्ष्मा उन्मूलन को लेकर स्वास्थ्य विभाग प्रतिबद्ध और कृतसंकल्पित है। इसको लेकर सामुदायिक स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। टीबी उन्मूलन को लेकर विभाग गंभीरता से कार्य कर रहा है। इसी कड़ी में सदर अस्पताल में डीआर-टीबी यानि ड्रग रेजिस्टेंट टीबी के मरीजों के इलाज, उपचार पर चर्चा के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. रत्नेश्वर प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में कार्यशाला आयोजित की गयी। जिसमें डीआर टीबी के मरीजों के उपचार, इलाज और मिलने वाली सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा की गयी। टीबी के मरीजों को निक्षय पोषण योजना के तहत मिलने वाली राशि को त्वरित भुगतान करने का निर्देश दिया गया। सीडीओ ने कहा कि टीबी का ही बिगड़ा हुआ रूप एमडीआर टीबी है। इसके बैक्टीरिया पर टीबी की सामान्य दवाएं नाकाम होने लगी हैं। आम टीबी कुपोषित या कमजोर शरीर वाले को अपनी गिरफ्त में लेती है, लेकिन एमडीआर टीबी यह भेद नहीं करती। यह हर वर्ग के व्यक्ति को अपनी चपेट में ले सकती है। सामान्य टीबी के मुकाबले यह रोग काफी जटिल होता है। इसकी मुख्य वजह एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल, टीबी की दवाओं को नियमित रूप से नहीं लेना, एमडीआर टीबी से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में रहना या टीबी का आधा-अधूरा इलाज करवाना है। यदि किसी रोगी में एमडीआर टीबी विकसित हो जाए, तो वह अपने आसपास रहने वाले लोगों में इसका संक्रमण फैला सकता है।

तुरंत जांच करवा कर डॉक्टरों से उचित इलाज करवाना चाहिए:
स्वास्थ्य विभाग की सहयोगी संस्था रिच इंडिया के सहयोग से कार्यशाला का आयोजन किया गया। रिच इंडिया के जिला कार्यक्रम समन्वयक श्याम कुमार सोनी ने बताया कि आम तौर पर सामान्य टीबी का इलाज छह महीने तक चलता है, लेकिन यदि किसी मरीज में एमडीआर टीबी विकसित हो जाए, तो न केवल उसका इलाज लंबा चलता है, बल्कि वह ज्यादा खर्चीला भी हो जाता है। दो साल लंबे इस इलाज में हजारों रुपये खर्च हो सकते हैं, इसलिए गरीब देशों में सामान्य लोगों को इलाज में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। सामान्य टीबी कहीं एमडीआर टीबी में परिणत न हो जाए, इसके लिए जरूरी है कि जैसे ही टीबी होने का पता चले, तुरंत जांच करवा कर डॉक्टरों से उचित इलाज करवाना चाहिए, न कि केमिस्ट से दवा खरीदकर खुद इलाज शुरू करना चाहिए।
संक्रमण से बचने के लिए मास्क का प्रयोग जरूरी:
डीपीसी हिमांशु शेखर ने बताया कि दवाओं का नियमित सेवन करना चाहिए, सेहत में सुधार के लक्षण दिखते ही इलाज बंद नहीं करना चाहिए, बल्कि पूरा इलाज करवाना चाहिए। एमडीआर टीबी से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर संक्रमण से बचने के लिए मास्क का प्रयोग करना चाहिए। इस दौरान टीबी को मात दे चुके चैंपियन ने अपने अनुभव को साझा कर जागरूकता का संदेश दिया। इस मौके पर जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम अरविन्द कुमार, श्याम कुमार सोनी, रतन संजय, हिमांशु शेखर समेत अन्य मौजूद थे।

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