• मशरक की निशा कुमारी ने एक साथ तीन शिशुओं को दिया जन्म
• पूर्व में सिजेरियन प्रसव होने के बावजूद कराया गया सामान्य प्रसव
• स्त्री रोग विशेषज्ञों और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की टीम रही तैनात
• सदर अस्पताल में हर महीने 600 से 650 महिलाओं का हो रहा प्रसव
छपरा। एक साथ तीन नवजातों की किलकारियों से छपरा सदर अस्पताल का प्रसव कक्ष गूंज उठा। एक ऐसी प्रसूता, जिसका पूर्व में सिजेरियन प्रसव हो चुका था, उसने इस बार सामान्य प्रसव के जरिए तीन शिशुओं को जन्म दिया। चिकित्सकीय दृष्टि से चुनौतीपूर्ण माने जाने वाले इस प्रसव को सदर अस्पताल के अनुभवी चिकित्सकों और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की टीम ने सफलतापूर्वक संपन्न कराया। इस घटना ने अस्पताल में उपलब्ध मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों को भी सामने रखा है। प्रसव के बाद नवजातों की चिकित्सकीय निगरानी की जा रही है। इनमें से दो शिशुओं को विशेष देखभाल के लिए एसएनसीयू में भर्ती कराया गया है।
जानकारी के अनुसार, सारण जिले के मशरक प्रखंड अंतर्गत तेजपुरवा गांव निवासी पंकज कुमार की पत्नी निशा कुमारी को प्रसव के लिए छपरा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। महिला का पूर्व में सिजेरियन प्रसव हो चुका था। ऐसे में इस बार प्रसव के दौरान विशेष चिकित्सकीय सतर्कता और निगरानी की जरूरत थी। चिकित्सकों की टीम ने महिला की स्थिति का आकलन करते हुए सुरक्षित सामान्य प्रसव कराया। एक साथ तीन शिशुओं के जन्म के बाद अस्पताल में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों के बीच भी खुशी का माहौल रहा। प्रसव के दौरान प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सीमा सिंह, डॉ. रेहाना अंजुम, डॉ. शैलेश कुमार तथा स्टाफ नर्स नेहा कुमारी और नेहा रानी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
चुनौतीपूर्ण प्रसव के प्रबंधन में टीम की अहम भूमिका
एक साथ तीन शिशुओं का जन्म होना सामान्य प्रसव की तुलना में अधिक चिकित्सकीय सतर्कता की मांग करता है। वहीं, पूर्व में सिजेरियन प्रसव का इतिहास होने के कारण इस तरह के मामले में प्रसूता की स्थिति का लगातार आकलन करना महत्वपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में मां और नवजातों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए चिकित्सकीय टीम को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना पड़ता है। छपरा सदर अस्पताल में अनुभवी चिकित्सकों और प्रशिक्षित स्टाफ की मौजूदगी में इस प्रसव का सफल प्रबंधन किया गया। जन्म के बाद नवजातों की स्थिति को देखते हुए आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराई जा रही है। दो शिशुओं को एसएनसीयू में भर्ती कर विशेष निगरानी में रखा गया है।
हर महीने 600 से 650 महिलाओं का हो रहा प्रसव
छपरा सदर अस्पताल में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। अस्पताल में प्रत्येक महीने औसतन 600 से 650 महिलाओं का प्रसव कराया जा रहा है। सामान्य प्रसव की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके पीछे प्रसव कक्ष की सुविधाओं में सुधार, आवश्यक दवाओं एवं चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, चिकित्सकों की नियमित मौजूदगी और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अस्पताल में प्रसव पूर्व जांच से लेकर प्रसव के दौरान चिकित्सकीय देखभाल और प्रसव के बाद मां एवं नवजात की निगरानी तक की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल संस्थागत प्रसव की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित, सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। जटिल प्रसव की स्थिति में समय पर चिकित्सकीय निर्णय लेना और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना भी इसी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
लेबर रूम से ऑपरेशन थिएटर तक सुविधाओं में सुधार
गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सदर अस्पताल के प्रसव कक्ष को आवश्यक उपकरणों और सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। लेबर रूम में प्रसव के दौरान मां और गर्भस्थ शिशु की स्थिति पर नजर रखने, चिकित्सकीय जरूरत के अनुसार उपचार करने तथा आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई करने की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
प्रसव कक्ष में आवश्यक दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ स्वास्थ्यकर्मियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण भी दिया जाता है। अस्पताल में चौबीस घंटे चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, जिन महिलाओं को चिकित्सकीय कारणों से सिजेरियन प्रसव की आवश्यकता होती है, उनके लिए ऑपरेशन थिएटर के माध्यम से शल्य चिकित्सा की सुविधा भी उपलब्ध है। जटिल प्रसव के मामलों में मां और नवजात की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए समय पर उपचार एवं जरूरत पड़ने पर विशेष देखभाल की व्यवस्था की जाती है।
प्रसूताओं के भोजन, दवा और साफ-सफाई पर भी जोर
अस्पताल में प्रसव के बाद महिलाओं की देखभाल को लेकर भी विशेष व्यवस्था की गई है। अस्पताल प्रबंधक राजेश्वर प्रसाद ने बताया कि प्रसव के बाद भर्ती महिलाओं को नियमित रूप से भोजन, चाय और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। अस्पताल परिसर को संक्रमणमुक्त रखने के उद्देश्य से साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है। मरीजों के बेड पर नियमित रूप से साफ चादर और कंबल उपलब्ध कराए जाते हैं।
उन्होंने बताया कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। प्रसव के बाद महिलाओं की जरूरतों का भी ध्यान रखा जाता है, ताकि उन्हें अस्पताल में बेहतर वातावरण और आवश्यक सुविधाएं मिल सकें।
सदर अस्पताल में एक साथ तीन शिशुओं का जन्म और पूर्व में सिजेरियन हो चुके होने के बावजूद सामान्य प्रसव का सफल प्रबंधन अस्पताल की प्रसव सेवाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हालांकि, ऐसे मामलों में प्रसव का तरीका पूरी तरह महिला की चिकित्सकीय स्थिति और विशेषज्ञों के आकलन पर निर्भर करता है। मां और नवजातों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ही प्रसव संबंधी निर्णय लिया जाता है।









