मुख्यमंत्री ने लॉन्च किया “सहयोग हेल्पलाइन 1100”, अब पंचायतों में हर महीने लगेगा समाधान शिविर

News4Bihar | भागलपुर | बिहार सरकार ने आम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार से आयोजित होने वाले “सहयोग शिविर” को लेकर आज बिहार के माननीय मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कर-कमलों द्वारा “सहयोग हेल्पलाइन नंबर 1100” और “सहयोग पोर्टल” का शुभारंभ किया गया। पोर्टल का वेब पता सहयोग पोर्टल है, जहां आम नागरिक अपनी समस्याएं ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे।

सरकार के निर्देशानुसार अब प्रत्येक माह के प्रथम एवं अंतिम मंगलवार को पंचायत स्तर पर “सहयोग शिविर” का आयोजन किया जाएगा। शिविर से 15 दिन पूर्व सभी विभाग अपने-अपने नोडल पदाधिकारियों की नियुक्ति करेंगे, जो संबंधित पंचायतों से आवेदन प्राप्त कर उन्हें पोर्टल पर अपलोड करेंगे।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि शिविर में प्राप्त आवेदनों का निष्पादन 15 दिनों के भीतर किया जाए, जबकि अधिकतम 30 दिनों के अंदर मामलों का समाधान अनिवार्य होगा। तय समयसीमा में कार्य पूरा नहीं होने पर संबंधित पदाधिकारी के विरुद्ध स्वतः निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।

भ्रष्टाचार और बिचौलियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से सभी सरकारी कार्यालयों एवं थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी कार्यालय या थाना में बार-बार आता-जाता पाया जाता है, तो उसकी जांच की जाएगी कि कहीं वह ब्रोकर के रूप में कार्य तो नहीं कर रहा। दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।

“सहयोग पोर्टल” की मॉनिटरिंग सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से की जाएगी। बैठक में जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने सभी विभागीय अधिकारियों को लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि योग्य मांगों का शीघ्र समाधान किया जाए तथा अयोग्य मामलों की जांच रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड कर संबंधित आवेदक को उपलब्ध कराई जाए।

बैठक में जमीन विवाद से जुड़े मामलों के त्वरित निष्पादन पर भी विशेष जोर दिया गया। वहीं वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव ने सभी थानाध्यक्षों एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों को लंबित मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि माता-पिता भरण-पोषण से जुड़े मामलों में अनुमंडल दंडाधिकारी को ₹5000 तक जुर्माना या तीन माह तक कारावास की कार्रवाई करने का अधिकार प्राप्त है। ऐसे मामलों में सख्ती बरतने को कहा गया।

बैठक में उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह, नगर पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र सिंह, अपर समाहर्ता दिनेश राम समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। प्रखंड स्तर से बीडीओ और थानाध्यक्ष ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

के लिए बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार से आयोजित होने वाले “सहयोग शिविर” को लेकर आज बिहार के माननीय मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कर-कमलों द्वारा “सहयोग हेल्पलाइन नंबर 1100” और “सहयोग पोर्टल” का शुभारंभ किया गया। पोर्टल का वेब पता सहयोग पोर्टल है, जहां आम नागरिक अपनी समस्याएं ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे।

सरकार के निर्देशानुसार अब प्रत्येक माह के प्रथम एवं अंतिम मंगलवार को पंचायत स्तर पर “सहयोग शिविर” का आयोजन किया जाएगा। शिविर से 15 दिन पूर्व सभी विभाग अपने-अपने नोडल पदाधिकारियों की नियुक्ति करेंगे, जो संबंधित पंचायतों से आवेदन प्राप्त कर उन्हें पोर्टल पर अपलोड करेंगे।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि शिविर में प्राप्त आवेदनों का निष्पादन 15 दिनों के भीतर किया जाए, जबकि अधिकतम 30 दिनों के अंदर मामलों का समाधान अनिवार्य होगा। तय समयसीमा में कार्य पूरा नहीं होने पर संबंधित पदाधिकारी के विरुद्ध स्वतः निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।

भ्रष्टाचार और बिचौलियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से सभी सरकारी कार्यालयों एवं थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी कार्यालय या थाना में बार-बार आता-जाता पाया जाता है, तो उसकी जांच की जाएगी कि कहीं वह ब्रोकर के रूप में कार्य तो नहीं कर रहा। दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।

“सहयोग पोर्टल” की मॉनिटरिंग सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से की जाएगी। बैठक में जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने सभी विभागीय अधिकारियों को लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि योग्य मांगों का शीघ्र समाधान किया जाए तथा अयोग्य मामलों की जांच रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड कर संबंधित आवेदक को उपलब्ध कराई जाए।

बैठक में जमीन विवाद से जुड़े मामलों के त्वरित निष्पादन पर भी विशेष जोर दिया गया। वहीं वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव ने सभी थानाध्यक्षों एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों को लंबित मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि माता-पिता भरण-पोषण से जुड़े मामलों में अनुमंडल दंडाधिकारी को ₹5000 तक जुर्माना या तीन माह तक कारावास की कार्रवाई करने का अधिकार प्राप्त है। ऐसे मामलों में सख्ती बरतने को कहा गया।

बैठक में उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह, नगर पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र सिंह, अपर समाहर्ता दिनेश राम समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। प्रखंड स्तर से बीडीओ और थानाध्यक्ष ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

 

भागलपुर। बिहार सरकार ने आम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार से आयोजित होने वाले “सहयोग शिविर” को लेकर आज बिहार के माननीय मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कर-कमलों द्वारा “सहयोग हेल्पलाइन नंबर 1100” और “सहयोग पोर्टल” का शुभारंभ किया गया। पोर्टल का वेब पता सहयोग पोर्टल है, जहां आम नागरिक अपनी समस्याएं ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे।

 

सरकार के निर्देशानुसार अब प्रत्येक माह के प्रथम एवं अंतिम मंगलवार को पंचायत स्तर पर “सहयोग शिविर” का आयोजन किया जाएगा। शिविर से 15 दिन पूर्व सभी विभाग अपने-अपने नोडल पदाधिकारियों की नियुक्ति करेंगे, जो संबंधित पंचायतों से आवेदन प्राप्त कर उन्हें पोर्टल पर अपलोड करेंगे।

 

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि शिविर में प्राप्त आवेदनों का निष्पादन 15 दिनों के भीतर किया जाए, जबकि अधिकतम 30 दिनों के अंदर मामलों का समाधान अनिवार्य होगा। तय समयसीमा में कार्य पूरा नहीं होने पर संबंधित पदाधिकारी के विरुद्ध स्वतः निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।

 

भ्रष्टाचार और बिचौलियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से सभी सरकारी कार्यालयों एवं थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी कार्यालय या थाना में बार-बार आता-जाता पाया जाता है, तो उसकी जांच की जाएगी कि कहीं वह ब्रोकर के रूप में कार्य तो नहीं कर रहा। दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।

 

“सहयोग पोर्टल” की मॉनिटरिंग सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से की जाएगी। बैठक में जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने सभी विभागीय अधिकारियों को लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि योग्य मांगों का शीघ्र समाधान किया जाए तथा अयोग्य मामलों की जांच रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड कर संबंधित आवेदक को उपलब्ध कराई जाए।

 

बैठक में जमीन विवाद से जुड़े मामलों के त्वरित निष्पादन पर भी विशेष जोर दिया गया। वहीं वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव ने सभी थानाध्यक्षों एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों को लंबित मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

 

उन्होंने कहा कि माता-पिता भरण-पोषण से जुड़े मामलों में अनुमंडल दंडाधिकारी को ₹5000 तक जुर्माना या तीन माह तक कारावास की कार्रवाई करने का अधिकार प्राप्त है। ऐसे मामलों में सख्ती बरतने को कहा गया।

 

बैठक में उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह, नगर पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र सिंह, अपर समाहर्ता दिनेश राम समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। प्रखंड स्तर से बीडीओ और थानाध्यक्ष ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल हुए।