अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि में रामनवमी के पावन अवसर पर शुक्रवार को एक अद्भुत और दिव्य नजारा देखने को मिला, जब रामलला के ललाट पर सूर्य तिलक किया गया। इस दौरान सूर्य की किरणें विशेष व्यवस्था के जरिए सीधे भगवान के मस्तक पर पड़ीं, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय और अलौकिक बना दिया।
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार नवमी तिथि की शुरुआत 26 मार्च की सुबह 11:48 बजे से हुई थी, जो 27 मार्च को सुबह 10:06 बजे तक रही। उदय तिथि के अनुसार आज यानी 27 मार्च 2026 को ही राम नवमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है।
जन्मोत्सव की भव्य तैयारी
रामनवमी के मौके पर अयोध्या में भव्य आयोजन किए गए हैं। मंदिर परिसर को आकर्षक फूलों और रोशनी से सजाया गया है। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है, जो रामलला के दर्शन के लिए लंबी कतारों में खड़े हैं।
सूर्य तिलक बना आकर्षण का केंद्र
रामलला के सूर्य तिलक की यह परंपरा इस बार विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रही। वैज्ञानिक तकनीक और पारंपरिक आस्था के संगम से तैयार इस व्यवस्था के जरिए सूर्य की किरणों को ठीक समय पर भगवान के ललाट तक पहुंचाया गया। जैसे ही यह दृश्य सामने आया, पूरे मंदिर परिसर में “जय श्री राम” के जयकारों से गूंज उठी।
सुरक्षा और व्यवस्था चाक-चौबंद
रामनवमी के अवसर पर अयोध्या में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन और पुलिस बल लगातार निगरानी में जुटे हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
(निष्कर्ष)
रामनवमी पर अयोध्या में रामलला का सूर्य तिलक न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह परंपरा और आधुनिक तकनीक के सुंदर संगम का भी उदाहरण बन गया है। हर साल की तरह इस बार भी यह दिव्य क्षण श्रद्धालुओं के लिए यादगार बन गया।










