• अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में अब सामान्य प्रसव की मिलेग
• 12 जरूरी उपकरणों से सुसज्जित होंगे प्रसव कक्ष
• एलडीआर बेड, भ्रूण हृदय गति जांच यंत्र और सीटीजी मशीन समेत कई जरूरी उपकरणों की होगी आपूर्ति
छपरा। गर्भवती महिलाओं को सामान्य प्रसव के लिए अब दूर स्थित बड़े अस्पतालों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। सरकार गांव और पंचायत के नजदीक स्थित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (एपीएचसी) में ही प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है। इसके लिए इन केंद्रों के प्रसव कक्षों को भारतीय जन स्वास्थ्य मानक (आईपीएचएस) के अनुरूप आवश्यक उपकरणों से सुसज्जित किया जाएगा। राज्य के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव कक्षों की मौजूदा व्यवस्था और उपकरणों की कमी का आकलन करने के बाद सरकार ने आवश्यकता के अनुसार उपकरण उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।
राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक डॉ. नवल किशोर चौधरी ने इस संबंध में सभी जिलों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। पत्र में कहा गया है कि अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सामान्य प्रसव की सुविधा सुचारू रूप से संचालित करने के लिए प्रसव कक्ष में आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता और उनकी क्रियाशीलता सुनिश्चित करना अनिवार्य है। इसके लिए सभी जिलों को बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड (बीएमएसआईसीएल) को उपकरणों की मांग भेजने का निर्देश दिया गया है।
12 प्रकार के उपकरणों की होगी आपूर्ति
राज्य स्वास्थ्य समिति ने जिलों से प्राप्त उपकरणों की कमी संबंधी प्रतिवेदनों की समीक्षा के बाद 12 प्रकार के उपकरणों की आपूर्ति बीएमएसआईसीएल के माध्यम से कराने का निर्णय लिया है। इनमें प्रसव के दौरान मां और नवजात की देखभाल के लिए जरूरी उपकरण शामिल हैं। निर्धारित सूची के अनुसार प्रत्येक अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रसव कक्ष के लिए एक एलडीआर बेड, दो भ्रूण हृदय गति जांच यंत्र (फीटल डॉप्लर), एक कार्डियोटोकोग्राफी (सीटीजी) मशीन, दो विद्युत चूषण यंत्र, दो परीक्षण बत्तियां, एक विद्युत ऑटोक्लेव मशीन, एक आपातकालीन उपचार ट्रॉली तथा दो डिजिटल शिशु तौल मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी।
इन उपकरणों से प्रसव के दौरान गर्भवती महिला की निगरानी, आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया, उपकरणों का संक्रमणमुक्त रखरखाव और नवजात शिशु की प्रारंभिक देखभाल में सहायता मिलेगी।
12 अन्य उपकरण स्थानीय स्तर पर खरीदे जा सकेंगे
बीएमएसआईसीएल के दर अनुबंध में शामिल नहीं होने वाले 12 अन्य उपकरणों की खरीद स्थानीय स्तर पर की जा सकेगी। इसके लिए निगम से अनुपलब्धता प्रमाणपत्र (एनए प्रमाणपत्र) प्राप्त करना होगा। इसके बाद बिहार वित्त नियमावली और विभागीय खरीद संबंधी निर्देशों का पालन करते हुए आवश्यकता के अनुसार उपकरण खरीदे जा सकेंगे। इस सूची में दो रक्तचाप मापक यंत्र, दो तापमापी, एक शिशु चूषण यंत्र, दो नाड़ी ऑक्सीजन मापक यंत्र, एक बैटरी सहित इन्वर्टर, दो मेयो कैंची, दो स्पंज होल्डर, दो सामान्य प्रसव किट, दो एपीजियोटॉमी किट, दो प्रसव सहायक चिमटी किट तथा वयस्क और बच्चों के लिए दो अंबु बैग शामिल हैं। इसके अलावा अलग-अलग आकार की ईटी और टीटी नलिकाओं की आवश्यकता के अनुसार खरीद की जा सकेगी। प्रसव कक्षों के लिए तीन अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों की व्यवस्था भी की जा रही है। इनमें रेडिएंट वार्मर, लैरींगोस्कोप और ग्लूकोमीटर शामिल हैं। इन उपकरणों का दर अनुबंध बीएमएसआईसीएल के स्तर पर प्रक्रियाधीन है। दर अनुबंध की सूचना प्राप्त होने के बाद इनके लिए भी ईएमएमएस पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन मांग भेजी जा सकेगी।
उपकरणों की मांग भेजने के लिए तय की गई प्रक्रिया
राज्य स्वास्थ्य समिति ने उपकरणों की मांग भेजने के लिए जिम्मेदारी और प्रक्रिया भी निर्धारित कर दी है। इसके तहत अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी अपने संबंधित प्राथमिक या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को पत्र के माध्यम से उपकरणों की मांग भेजेंगे। इसके बाद प्राथमिक या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी उस मांग पत्र पर प्रतिहस्ताक्षर कर उसे उपकरण रखरखाव एवं प्रबंधन प्रणाली (ईएमएमएस-ई-उपकरण) पोर्टल पर अपलोड करेंगे और ऑनलाइन मांग दर्ज करेंगे।
जिला स्तर पर सिविल सर्जन विभिन्न प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से प्राप्त मांगों की समीक्षा करेंगे। आवश्यकता और उपलब्धता का आकलन करने के बाद वे ईएमएमएस पोर्टल पर मांग को अनुमोदित करेंगे। उपकरणों की मांग भेजने से पहले अस्पताल में मरीजों की संभावित संख्या, पहले से उपलब्ध उपकरणों और वहां दी जा रही चिकित्सकीय सेवाओं को भी ध्यान में रखना होगा। पहले से उपलब्ध उपकरणों की जानकारी बीईएमएमपी पोर्टल के आधार पर देखी जाएगी।
अनावश्यक रेफरल रोकने और नजदीक में प्रसव सुविधा देने की पहल
सरकार की इस पहल का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को उनके निवास के नजदीक सामान्य प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराना और अनावश्यक रूप से बड़े अस्पतालों में भेजे जाने की प्रवृत्ति पर नियंत्रण करना है। स्वास्थ्य विभाग ने 10 जुलाई 2026 को जारी पत्र के माध्यम से सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में रोगियों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजने की व्यवस्था मजबूत करने और अनावश्यक रेफरल को नियंत्रित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में भारतीय जन स्वास्थ्य मानक के अनुरूप चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसी क्रम में अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रसव कक्षों को मजबूत करने की पहल की गई है। उपकरणों की उपलब्धता के साथ उनके सुचारू संचालन और नियमित रखरखाव पर भी ध्यान देना होगा।
कार्यपालक निदेशक ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर उपकरणों की मांग भेजने का निर्देश दिया है, ताकि बीएमएसआईसीएल के माध्यम से उनकी आपूर्ति समय पर सुनिश्चित की जा सके। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर सुरक्षित सामान्य प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।









