सारण में एमडीए अभियान की जमीनी हकीकत परखने पहुंची राष्ट्रीय टीम

• संयुक्त निदेशक ने किया सारण का दौरा
• दरियापुर और अमनौर में हुई गहन समीक्षा
• घर-घर जाकर लाभार्थियों से लिया फीडबैक

छपरा। फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जिले में चल रहे सर्वजन दवा सेवन अभियान की जमीनी स्थिति का आकलन करने के लिए राष्ट्रीय स्तर की टीम ने सारण जिले का दौरा किया। एनसीवीबीडीसी की टीम ने दरियापुर और अमनौर प्रखंडों में चल रहे एमडीए की गतिविधियों, एमएमडीपी सेवाओं तथा समग्र वेक्टर जनित रोग कार्यक्रम के क्रियान्वयन की समीक्षा की। टीम का नेतृत्व डॉ. रिंकू शर्मा (संयुक्त निदेशक-सह-प्रमुख, एलएफ) ने किया। उनके साथ डॉ. राजेश पांडेय (डब्ल्यूएचओ स्टेट कोऑर्डिनेटर) एवं डॉ. अनुज सिंह रावत (स्टेट फाइलेरिया कंसल्टेंट) भी मौजूद रहे। इस दौरान जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. भूपेंद्र कुमार, एमओआईसी डॉ. सतेंद्र कुमार सिंह, डॉ. शशांक शुभम, जिला वीबीडी सलाहकार सुधीर कुमार समेत संबंधित प्रखंड स्वास्थ्य टीम तथा डब्ल्यूएचओ और पिरामल टीम के सदस्य उपस्थित रहे। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य एमडीए गतिविधियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना, निगरानी तंत्र को मजबूत करना, एमएमडीपी सेवाओं की समीक्षा करना तथा प्रखंड एवं फील्ड स्तर पर आ रही संचालन संबंधी चुनौतियों का समाधान करना था। टीम ने स्पष्ट किया कि फाइलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सामुदायिक सहयोग, नियमित निगरानी और गुणवत्ता पूर्ण क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि सारण जिला फाइलेरिया मुक्त लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सके।

सीएचसी दरियापुर में समीक्षा

टीम ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) दरियापुर पहुंचकर एप्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह से मुलाकात की तथा वहां तैनात एएनएम से बातचीत कर बूथ स्तर पर चल रही दवा वितरण गतिविधियों की जानकारी ली। एमएमडीपी (Morbidity Management & Disability Prevention) क्लिनिक और प्रयोगशाला का निरीक्षण कर दस्तावेजों का सत्यापन किया गया और मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं की गुणवत्ता की समीक्षा की गई।
धने छपरा गांव में घर-घर गतिविधि का निरीक्षण
दरियापुर प्रखंड के धने छपरा गांव में टीम ने घर-घर जाकर दवा खिलाने की प्रक्रिया का अवलोकन किया। इस दौरान दवा खिलाने वाले स्वास्थ्य कर्मियों से बातचीत कर जमीनी स्तर की चुनौतियों की जानकारी ली। कुछ घरों में दवा लेने से इनकार की स्थिति (Refusal Households) पर भी चर्चा की गई और समुदाय में जागरूकता बढ़ाने के उपायों पर मार्गदर्शन दिया गया।

बिशनपुर गांव में माइक्रोफाइलेरिया मरीज से मुलाकात
बिशनपुर गांव में टीम ने एक माइक्रोफाइलेरिया पॉजिटिव मरीज से मुलाकात कर प्रोफिलैक्टिक डोज (रोकथाम हेतु दी जाने वाली दवा) के सेवन की पुष्टि की। इससे यह सुनिश्चित किया गया कि चिन्हित मरीजों को समय पर दवा मिल रही है और निगरानी प्रक्रिया प्रभावी है।

सीएचसी अमनौर में रिकॉर्ड की समीक्षा।

अमनौर प्रखंड के सीएचसी में टीम ने एमओआईसी से मुलाकात कर एमएमडीपी क्लिनिक एवं प्रयोगशाला के अभिलेखों की जांच की। शाम के समय आशा फैसिलिटेटरों के साथ ब्रीफिंग सत्र आयोजित किया गया, जिसमें जमीनी स्तर पर आने वाली चुनौतियों, दवा सेवन में हिचकिचाहट और सामुदायिक सहभागिता को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा हुई। राष्ट्रीय टीम ने स्पष्ट किया कि फाइलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सामुदायिक सहभागिता, नियमित निगरानी और गुणवत्ता पूर्ण क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है।