सारण के बकवां गांव में ऐतिहासिक फैसला: अब नहीं होगा मृत्युभोज, ग्रामीणों ने लिया सामूहिक संकल्प

     सारण: जिले के पानापुर प्रखंड अंतर्गत बकवां गांव में रविवार को आयोजित एक अहम बैठक में ग्रामीणों ने सामाजिक सुधार की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए मृत्युभोज प्रथा को समाप्त करने का सामूहिक निर्णय लिया। गांव के इस फैसले को क्षेत्र में सकारात्मक और प्रेरणादायक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

बैठक के दौरान मृत्युभोज प्रथा पर विस्तार से चर्चा हुई। ग्रामीणों ने कहा कि परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु होने पर पहले ही दुःख का पहाड़ टूट पड़ता है। इलाज में लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं और इसके बाद सामाजिक दबाव के कारण श्राद्ध कर्म व मृत्युभोज पर भारी खर्च करना पड़ता है। इस वजह से कई परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हो जाते हैं और कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं।

ग्रामीणों का स्पष्ट मत था कि यह प्रथा वर्तमान समय में न तो व्यावहारिक है और न ही आवश्यक। समाज को ऐसी कुरीतियों से बाहर निकलकर आर्थिक रूप से सशक्त और जागरूक बनने की जरूरत है।

इसी सोच के तहत बकवां गांव निवासी मुकेश कुमार ने अपनी दादी के निधन के बाद मृत्युभोज नहीं करने का साहसिक निर्णय लिया। उनके इस कदम की बैठक में मौजूद सभी ग्रामीणों ने सराहना की और इसे पूरे समाज के लिए उदाहरण बताया।

बैठक में हरेराम राय, डॉ. धर्मेन्द्र कुमार, विनोद कुमार यादव, राजेश्वर राय, सुरेन्द्र राय, डॉ. विक्रमा राय, डॉ. सुनिल राय, अनुज दास, सभा राय सहित दर्जनों ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने और समाज को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का संकल्प दोहराया।

ग्रामीणों ने आशा जताई कि बकवां गांव की यह पहल अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा बनेगी और समाज में सकारात्मक बदलाव की नई शुरुआत होगी।