Todays News | भोजपुरी सम्मेलन में राजनीति हावी — समापन के बाद उठे बड़े सवाल.

News4Bihar | Saran | अमनौर में आयोजित अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन का भव्य समापन तो हो गया.लेकिन इस बार कार्यक्रम साहित्य से ज़्यादा राजनीति, कम भीड़ और व्यवस्थाओं की बदइंतज़ामी को लेकर सुर्खियों में रहा।अमनौर हाई स्कूल मैदान… जहां भोजपुरी भाषा की अस्मिता और सम्मान के नाम पर जुटा सम्मेलन रविवार को समाप्त हुआ। केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दूबे और सारण सांसद राजीव प्रताप रूड़ी मंच पर मौजूद रहे।
रूड़ी की मौजूदगी ने उन तमाम अटकलों को खत्म किया, जिनमें कहा जा रहा था कि सांसद कार्यक्रम से दूरी बना रहे हैं। सम्मेलन में अष्टम सूची की मांग सबसे ऊंची आवाज में रखी गई साहित्यकारों ने भोजपुरी को राज्य की द्वितीय राजभाषा बनाने, भोजपुरी अकादमी के पुनर्गठन और शिक्षकों की नियुक्ति जैसे मुद्दों पर भी जोर दिया।लेकिन सवाल यहां से शुरू होते हैं.सम्मेलन साहित्य का था, भीड़ कम थी… और जो भीड़ थी, वह जिविका दीदीयों पर निर्भर दिखी, जिन्हें बस और ऑटो से मैदान तक लाया गया। मंच पर भोजपुरी की बात हुई पर भाषण ज्यादातर हिंदी में। लोगों ने इसे कार्यक्रम की सबसे बड़ी विडंबना बताया और सबसे बड़ी चूक भोजपुरी के ‘शेक्सपियर’, महान लोक कलाकार भिखारी ठाकुर का मंच से किसी ने उल्लेख तक नहीं किया। साहित्यकारों की नजर में यह सम्मेलन की सबसे बड़ी गलती रही।
विधायिका छोटी कुमारी पूरे आयोजन में सक्रिय रहीं. अमनौर के बाजार से लेकर गेट तक उनके पोस्टर और बैनर छाए रहे। वहीं अमनौर विधायक मंटू सिंह की मौजूदगी और सक्रियता कम देखने को मिली। उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा कार्यक्रम में नहीं पहुंचे, जबकि उनका आगमन तय माना जा रहा था।
उनके नहीं आने के बाद आयोजन समिति ने कार्यक्रम समय से पहले ही समाप्त कर दिया.